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वाह! बहुत सुंदर। कबीर याद आ गए।
सादर आभार
"निर्धन की मुस्कान में मिला ईश का प्यार।"- सत्य वचन।
जी सादर अभिवादन
वाह . रहीम कवि ने भी कहा है ---जो रहीम दीनहि लखै दीनबन्धु सम होय ..
सादर आभार आ0
घर बनाते आजकल खोखली सी नींव पर ही घर बनाते आजकल। मौन हों संवाद पूछें क्यों डराते आजकल।। जो हृदय की वेदना जग से छुपाने में लगे, वह स्वयं की म...
वाह! बहुत सुंदर। कबीर याद आ गए।
ReplyDeleteसादर आभार
Delete"निर्धन की मुस्कान में मिला ईश का प्यार।"- सत्य वचन।
ReplyDeleteजी सादर अभिवादन
ReplyDeleteवाह . रहीम कवि ने भी कहा है ---जो रहीम दीनहि लखै दीनबन्धु सम होय ..
ReplyDeleteसादर आभार आ0
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