चित्रकार की तूलिका,भरे गगन में रंग।
सूर्य उदय की लालिमा,रचती नवल प्रसंग।।
नित्य स्वप्न भी जागते,सूर्योदय के संग।
कनक रश्मियाँ घट लिए,भरे स्वप्न में रंग।।
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...
अद्भुत! मनोहारी! अति-प्रशंसनीय सृजन.
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