हार जीत
कुंडलियां
जीते भी हैं हार सम,लगे हार भी जीत।
लोकतंत्र अब देखता,कौन रहेगा मीत।।
कौन रहेगा मीत,सगा भी अवसर देखे।
राजनीति के रंग,बदलते कैसे लेखे।।
हुआ अचंभित देश,क्षोभ को सारे पीते।
नहीं कार्य का मोल,जाति में बॅंट कर जीते।।
अनिता सुधीर आख्या
शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग। वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।। शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात। हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह...
सटीक !
ReplyDeleteसादर आभार आ0
Deleteआइए चलें अपना कर्तव्य निभाएं 😊
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