Tuesday, February 8, 2022

टकराव

 मध्य अहम् की दीवारों से

कैसे पायें पार।


रखें ताक पर धीरज को

ढूँढ़ रहें क्यों सेज,

पहन प्रेम का आभूषण

पाती मन की भेज 

बनता है राई का पर्वत

बात बात पर रार।।

मध्य अहम् की दीवारों से,कैसे पायें पार।।


किसकी रेखा बड़ी रहेगी

ह्रदय पटल पर द्वंद

कीट द्वेष का कुलबुल करता

बना गले का फंद

उम्मीदों की गठरी भारी

दूजे को दें भार।

मध्य अहम् की दीवारों से,कैसे पायें पार।।


प्रेम कूप अब बिना नीर के

सूख रहे हैं भाव

रहे क्रोध में तनी भृकुटियाँ

छिपा रहे हैं घाव

उच्च नासिका अब कब सोचे

नैना कर लें चार

मध्य अहम् की दीवारों से ,कैसे पायें पार।।


अनिता सुधीर

Saturday, February 5, 2022

माँ शारदे


 

मनहरण घनाक्षरी छन्द


शिक्षा कला संगीत की,देवी तुम हो शारदे 

हृदय में प्रीत भरो, जीवन को तार दे।।

विचार और भावना,मन में हो संवेदना

करते यह प्रार्थना, जन्म ये सुधार दे।।

धवल वस्त्र धारिणी ,मयूर हंस वाहिनी ,

सद्बुद्धि विद्या दायिनी, ज्ञान से सवाँर दे।।

माता वीणा वादिनि को ,पूजते विष्नु महेश

देकर आशीष अम्बा, तम से उबार दे।।


अनिता सुधीर आख्या


Friday, February 4, 2022

दोस्त


 लघु कथा

नीता- (सुमन से) हर समय घर में रहती हो, चलो मेरे साथ आज तुम्हें किटी पार्टी में ले चलते हैं। तुम भी ज्वाइन कर लेना।

सुमन- नीता, मैं तुम्हारे साथ नहीं चल सकती।
रोहन स्कूल से आने वाला ही होगा, मेरा समय उसके साथ ही बीत जाता है, पढ़ाई भी मैं ही देखती हूँ और आजकल तो परीक्षा भी चल रही है।

नीता- तुम उसकी ट्यूशन क्यों नहीं रख देती। देखो, मैंने प्रतीक को ट्यूशन क्लासेस ज्वाइन करवा रखी हैं, परीक्षा की तैयारी भी वो लोग करवा देते हैं और मैं इन सब झंझट से मुक्त रहती हूँ।
(नीता और सुमन दोनों ही अच्छी दोस्त हैं और दोनों के बच्चे आठवीं कक्षा में एक साथ ही पढ़ते हैं)

परीक्षा परिणाम देख कर
नीता- प्रतीक (डांटती हुई), यह तुम्हारे इतने कम नंबर क्यों आए हैं! तुम्हारी तो मैंने ट्यूशन भी लगवा रखी है, इतना पैसा तुम्हारे ऊपर खर्च करते हैं, रोहन को देखो, बिना ट्यूशन के भी उसके कितने अच्छे नंबर आए हैं। तुम पढ़ने जाते हो या घूमने!

सुमन- अब बस भी करो नीता। मैं तुम्हारी दोस्त हूँ, एक दोस्त का कर्तव्य होता है कि वो अपने दोस्त को सही मार्ग दिखाए। मैं कई दिनों से देख रही कि तुम्हारा ध्यान प्रतीक और घर में नहीं है। तुम इतनी पढ़ी-लिखी हो, तुम प्रतीक को खुद ही पढ़ा सकती हो फिर तुमने उसकी ट्यूशन क्यों लगा रखी है। उसके घर आने के बाद तुम आए दिन बाहर चली जाती हो, केवल ट्यूशन लगाने से तुम्हारी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। इस नाजुक उम्र में बच्चों को माता-पिता के समय और प्यार की भी आवश्यकता होती है। समाज में देखो, आजकल कोई न कोई खबर सुर्खियों में रहती है। अपने बच्चे की दोस्त बन कर उसके साथ रहो और पढ़ाई में उसकी मदद करो। जब तुम उसे समय दोगी तो वो अपनी परेशानियाँ तुम्हें बताएगा और तुम समाधान कर पाओगी, अन्यथा वो पता नहीं किससे कहे और भगवान न करे, किसी गलत साथ में पड़ जाए। 

नीता- (पश्चाताप से) सुमन, तुम्हारे जैसे दोस्त किस्मत वालों को मिलते हैं, मेरी दोस्त ने मुझे अपने बेटे का दोस्त बना हमें सही मार्ग दिखाया है।

अनिता सुधीर 

चित्र गूगल से

Thursday, February 3, 2022

गीत


गीत

आलोकित है जग सारा,बहती भावों की धारा।
श्रद्धा के मोती चुनकर,करते शृंगार तुम्हारा।।

जीवन का ताना बाना,सुख-दुख का जाना-आना।
रो-रो कर दिन क्यों काटें,दुख हँस कर सहते जाना।।
आती है जब कठिनाई, हो जाता जीवन खारा ।
थामे तुम हाथ बढा के, देते हो सदा सहारा ।।
आलोकित है ..

जग के पालनहारे तुम ,हम सबके रखवारे तुम ।
प्रेम सुमन अर्पित करते, दूर करो अँधियारे तुम।।
नाव फँसी तूफानों में, अब मिलता नहीं किनारा 
अन्तर्मन में दीप जला, भर दो मन में उजियारा ।।
आलोकित है....

सच्चाई की बोली से ,सत्कर्मों की झोली से।
नफरत द्वेष मिटा मन से,हृदय भरो रंगोली से।।
साथ भला क्या जाएगा ,छूटे गलियाँ चौबारा ।
पंछी छोड़े तन पिँजरा ,मानव जीवन बंजारा ।।
आलोकित है ....


अनिता सुधीर

Wednesday, February 2, 2022

श्रमिक

 


कुंडलिया छन्द


।१।

सहता रहता त्रासदी ,श्रम का यह भगवान।

हाड़ मांस का तन बना,करता कार्य महान।।

करता कार्य महान, देश की सेवा करता ।

मिला नहीं अधिकार, सदा तिल तिल कर मरता।।

करे भवन निर्माण , स्वेद कण पल पल बहता।

वृक्ष तले है ठाँव, ताप जीवन का सहता ।।


।२।


नेता सब वादे करें,पूरी करें न बात।

उचित मूल्य इनको मिले,तब सुधरे हालात।।

तब सुधरे हालात,चले श्रमिकों का खर्चा।

शोषण का इतिहास,सदा चलती है चर्चा ।।

इन्हें मिले सम्मान ,रहें ये सदा विजेता  ।

श्रमिक नहीं मजबूर,सुनो अब सारे नेता ।।


अनिता सुधीर आख्या

चित्र गूगल से साभार


Monday, January 31, 2022

रंगमंच

 *

सुनते सुनते थक गया हूँ कि दुनिया रंगमंच है और तू किरदार.. 

 मैं ही सदैव क्यों किरदार बनूँ !

अब नहीं जीना मुझे ये जीवन.

मेरी डोर सदैव किसी के हाथ में क्यों रहे ...

कहते हुए अति क्रोध में चिल्लाया था "तन "

 मेरा अपना " तन " ...

आज  से मैं ही रंगमंच हूँ...

यदि मैं रंगमंच तो फिर किरदार कौन ?

अकुलाहट भरे " मन "  ने कोने से दबी आवाज में कहा अब मैं किरदार हूँ तुम्हारा..

तुम किरदार बन मनमानी करते रहे और पतन की ओर जा रहे हो !

मुझे तुम्हारे इस तन के रंगमंच पर  अपना किरदार  निभाना है और अभिनय को वास्तविक रूप देना है। 

बाहर की आवाजें कैमरा, लाइट ,साउंड, कट का शोर

कुर्सियों को खाली करता जा रहा है।

अब अन्तर्मन के लाइट और साउंड को सुन अभिनय करना है ..

नेपथ्य से नई आवाजें आने लगी हैं..



अनिता सुधीर आख्या

Wednesday, January 26, 2022

गणतंत्र दिवस


 मातृभूमि अभिमान है,अमर तिरंगा शान।

जयभारत जयहिंद का,सब मिल करिये गान।।


स्वर्ण मुकुट हिमगिरि सजे,सागर पैर पखार।

मानचित्र अभिमान को,व्याघ्र सरिस व्यवहार।

संविधान इस देश का ,देता सम अधिकार ।

देश एक, ध्वज एक हो,मौलिकता हो सार ।।

संस्कृति उत्तम देश की,इस पर हैअभिमान।।

जयभारत जयहिंद का,सब मिल करिये गान।


सर्व धर्म सद्भाव हो ,करिये यही विचार।

भारत के निर्माण में ,रहे एकता सार ।।

मातृभूमि रज भाल पर ,वंदन बारम्बार,

लिये तिरंगा हाथ में,करते जय जयकार।

अनेकता में एकता ,भारत की पहचान।

जयभारत जयहिंद का,सब मिल करिये गान।।


श्वेत शांति अरु केसरी,रूप लिये बलिदान।

रंग हरा संपन्नता,भारत माँ पहचान ।।

खादी वस्त्र विचार है,रखिये इसका मान ।

देशी को अपनाइये,बदले हिंदुस्तान

स्वच्छता अभियान हो, जन जन का अभियान।

जयभारत जयहिंद का,सब मिल करिये गान।।।


देशप्रेम कर्तव्य हो ,देशभक्ति ही नेह।

पंचतत्व में लीन हों,ओढ़ तिरंगा देह।

अपने हित को साधिये,सदा देश उपरांत ।

देशप्रेम अनमोल है ,अडिग रहे सिद्धान्त।

माटी मेरे देश की,है मेरा अभिमान।।

जयभारत जयहिंद का,सब मिल करिये गान।।


अनिता सुधीर आख्या


आओ कान्हा मन हल्का कर लें

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं  आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए  दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...