पैरालिंपिक
रोग तन मन को लगे जब,वश नहीं उस पर रहे।
जीत का रख हौसला जो,अनगिनत दुख नित सहे।
सोच से विकलांग ना बन,लक्ष्य ले वह चल पड़े
वह सबल दिव्यांग बन कर,नव सफलता नित कहें।।
अनिता सुधीर आख्या
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...
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