पैरालिंपिक
रोग तन मन को लगे जब,वश नहीं उस पर रहे।
जीत का रख हौसला जो,अनगिनत दुख नित सहे।
सोच से विकलांग ना बन,लक्ष्य ले वह चल पड़े
वह सबल दिव्यांग बन कर,नव सफलता नित कहें।।
अनिता सुधीर आख्या
घर बनाते आजकल खोखली सी नींव पर ही घर बनाते आजकल। मौन हों संवाद पूछें क्यों डराते आजकल।। जो हृदय की वेदना जग से छुपाने में लगे, वह स्वयं की म...
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