मुक्तक
माँ जन्मी अपने तन जब,वह भाव अघाती है।
सृजन पीर माधुर्य लिए,नित प्रीति लगाती है।।
करे गर्भ जब अठखेली,धड़कन सरगम बनती,
कोख सींच आशाओं से,मन द्वार सजाती है।।
अनिता सुधीर आख्या
नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान नशा धूम्रपान धुँए के बनते छल्लों में परिवारों का सपना सोया पेट काट कर शुल्क चुका...
सुन्दर
ReplyDeleteहार्दिक आभार
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