शिव विवाह
त्रिनेत्र सुशोभित चंद्र ललाट, त्रिशूल लिए कर साज चलें हैं।
विचित्र लगे शिव कंठ भुजंग,बरात पिशाच समाज चले हैं।।
विभूति लगे तन मुंड कपाल,मृदंग लिए सब बाज चले हैं।
विराज रहे तब देव सुजान, विमान सजा अधिराज चलें हैं।।
नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान नशा धूम्रपान धुँए के बनते छल्लों में परिवारों का सपना सोया पेट काट कर शुल्क चुका...
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