रेख विभाजन के लफड़े।
झेल रहा आँगन झगड़े।।
रहा पृष्ठ पर बँटवारा।
होते सपनों के चिथड़े।।
आजादी ने कीमत दी
लज्जा के उतरे कपड़े।।
सुख-दुख के सब साथी ने
मज़हब के ओढ़े मुखड़े।।
स्वर्ण विहग की पीड़ा में
होते अंतस के टुकड़े।।
नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान नशा धूम्रपान धुँए के बनते छल्लों में परिवारों का सपना सोया पेट काट कर शुल्क चुका...
मार्मिक अभिव्यक्ति
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