रेख विभाजन के लफड़े।
झेल रहा आँगन झगड़े।।
रहा पृष्ठ पर बँटवारा।
होते सपनों के चिथड़े।।
आजादी ने कीमत दी
लज्जा के उतरे कपड़े।।
सुख-दुख के सब साथी ने
मज़हब के ओढ़े मुखड़े।।
स्वर्ण विहग की पीड़ा में
होते अंतस के टुकड़े।।
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...
मार्मिक अभिव्यक्ति
ReplyDelete