Monday, February 3, 2020

अहिंसा

**
सत्य अहिंसा बात पुरानी,रार मचाना आता है ।
दूजे घर में आग लगा के,दाल पकाना आता है ।।

देख! द्रवित होते अब गांधी,ग़द्दारों से देश भरा ,
शिक्षा के मंदिर में देखो,हथियारों से नाता है ।।

अपशब्दों का दौर बढ़ा है ,वादों की अब झड़ी लगी,
विश्वास नहीं नेताओं पर,इंसान ठगा जाता है ।

रामराज्य का सपना देखा, हिंसा बढ़ती जाती है,
अपनी ढपली राग बजाते ,भारत कहाँ सुहाता है।।

सीमाओं पर जो डटे रहे,याद करो बलिदानों  को
इन छोटी बातों पर तुमको, गाल बजाना भाता है ।

समृद्ध संस्कृति भारत की है ,इसका मान बढ़ाएं हम ,
सत्य अहिंसा का व्रत लेकर,वचन निभाना आता है ।


©anita_sudhir

No comments:

Post a Comment

प्रियतम

उर द्वारे की सांकल खनकी,धड़कन ने मधु गीत लिखा। नयनों की आँखमिचोली ने,तुमको मन का मीत लिखा।। टेढ़ी मेढ़ी राहें मिलतीं,सपनों की पगडंडी में  कड़...