पंक मध्य अब कमल नहिं,साफ हुआ अब हाथ
मुफ्त नीर विद्युत चला ,लेकर सबको साथ ।
मुफ्त नीर विद्युत चला ,लेकर सबको साथ ।
शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग। वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।। शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात। हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह...
सबको मुफ़्त का माल चाहिए बस....
ReplyDeleteजी सत्य कथन
Deleteजिसे ये मुफ्त का देकर अहसान जताते हैं ,वो तो एक नागरिक के अधिकार हैं