Sunday, February 16, 2020

रामायण


कुंडलिया
श्री रामायण ग्रंथ में ,अयन कथा प्रभु राम ।
दर्शन ,चिंतन राम का,'सप्त कांड' हरि नाम।
'सप्त कांड'हरि नाम,भक्ति से शीश झुकाया ।
चौबिस हजार श्लोक,गान कर मन हरषाया ।
आत्मसात कर पाठ ,भजे मन श्री नारायण ।
मिले मोक्ष का द्वार,पढ़े जब श्री रामायण ।
©anita_sudhir

1 comment:

प्रियतम

उर द्वारे की सांकल खनकी,धड़कन ने मधु गीत लिखा। नयनों की आँखमिचोली ने,तुमको मन का मीत लिखा।। टेढ़ी मेढ़ी राहें मिलतीं,सपनों की पगडंडी में  कड़...