Sunday, March 24, 2024
होलिका दहन
Thursday, March 21, 2024
विश्व कविता दिवस पर
*बनी प्रेयसी सी चहकी*
खुली गाँठ मन पल्लू की जब
पृष्ठों पर कविता महकी
बनी प्रेयसी शिल्प छन्द की
मसि कागद पर वह सोई
भावों की अभिव्यक्ति में फिर
कभी पीर सह कर रोई
देख बिलखती खंडित चूल्हा
आग काव्य की फिर लहकी।।
लिखे वीर रस सीमा पर जब
ये हथियार उठाती है
युग परिवर्तन की ताकत ले
बीज सृजन बो जाती है
आहद अनहद का नाद लिये
कविता शब्दों में चहकी।।
शंख नाद कर कर्म क्षेत्र में
स्वेद बहाती खेतों में
कभी विरह में लोट लगाती
नदी किनारे रेतों में
रही आम के बौरों पर वह
भौरों जैसी कुछ बहकी।।
झिलमिल ममता के आँचल में
छाँव ढूँढती शीतलता
पर्वत शिखरों पर जा बैठी
भोर सुहानी सी कविता
लिए अमरता की आशा में
युग के आँगन में कुहकी।।
अनिता सुधीर आख्या
Sunday, March 3, 2024
गीतिका
Monday, January 22, 2024
जय श्री राम
जय श्री राम
जय श्री राम
श्याम वर्ण के राम लला का,हुआ अलौकिक दर्शन अब
हर्षित मन भावुक हो करता,सत्य सनातन वंदन अब ।
योगीराज नमन तुमको है,देवत्व दिया जो पाथर को
बाल सुलभ ममता में गढ़ दी ,स्मित अधरों पर नर्तन
अब।
जय श्री राम
घर घर में प्रभु राम विराजो,अंतस सबका निर्मल कर दो।
शुद्ध आचरण हो मानव का,भक्ति भाव हर उर में भर दो।।
सीख सकें मर्यादा तुमसे,पदचिन्हों पर चले तुम्हारे
यही कामना जनमानस की,नाम तुम्हारा भव से तर दे।।
अनिता सुधीर आख्या
Friday, January 5, 2024
अयोध्या
#SHRIRAMBHAJAN
आज रामलला मंदिर के अक्षत पा कर अभिभूत हूँ
गीत
देख अयोध्या की शोभा को,दीप वर्तिका हर्षायी।
नवल भोर की आस जगाकर,संस्कृति जग में मुस्कायी।।
सदियों ने जब करी तपस्या,दिव्य स्वप्न साकार हुआ।
बाल रूप में प्रिय को पाकर,भावों का अँकवार हुआ।।
रोम-रोम आनंदित हो फिर,बना राम का अनुयायी।।
नवल भोर...
पावन सरयू के घाटों ने,किए भव्यता के दर्शन।
लहर-लहर अब ध्यान लगाए,करे चेतना का चिंतन।।
हुलस-हुलस पग रज छूने को,तटिनी बंधन तज आयी
नवल भोर...
मर्यादित हो युग बदले जब,दूर भागता अँधियारा ।
दो अक्षर से सत्य सनातन,लाए जग में उजियारा।।
नव्य अलौकिक सृष्टि सृजन ने,भारत बगिया महकायी।।
नवल भोर...
अनिता सुधीर आख्या
लखनऊ
चित्र गूगल से साभार
Sunday, December 24, 2023
Saturday, December 16, 2023
गीतिका
सरसी छन्द आधारित गीतिका
एक डाल के सब पंछी हैं,सबमें है कुछ खास।
किसी कमी पर कभी किसी का,मत करिए उपहास।।
डर-डर के जीवन क्या जीना,खोने पर क्यों कष्ट।
डरे नहीं बाधाओं से जो,वही रचे इतिहास ।।
सुख-दुख तो आना जाना है,ये जीवन का चक्र
कुछ दिन जो अब शेष बचे हैं,मन में भरें उजास।।
जो होना वो होकर रहता,विधि का यही विधान
किसके टाले कब टलता यह,राम गये बनवास।।
दया धर्म में तन अर्पण कर,रखिए शुद्ध विचार
सतकर्मों से मिट पायेगा,इस धरती का त्रास।।
अनिता सुधीर आख्या
आओ कान्हा मन हल्का कर लें
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...
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मकर संक्रांति मकर राशि में सूर्य जब, करें स्नान अरु दान। उत्सव के इस देश में, संस्कृति बड़ी महान ।। सुत की मङ्गल कामना, माता करे अपार। तिल लड...
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पनिहारन लिए भार मटकी का चलती कोस अढ़ाई पनिहारन धरा तरसती अब बूँदों को हुआ वक्ष उसका खाली जीव जगत तब व्याकुल रोया कहाँ गया उसका माली तपी ...
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दक्षिणा *** 'मॉम पंडित जी का पेमेंट कर दो ' सुन कर इस पीढ़ी के श्रीमुख से संस्कृति कोने में खड़ी कसमसाई थी सभ्यता दम तोड़ती नजर आई थी ...

