Sunday, January 5, 2020

पिरामिड
नव्य/नूतन

हो
स्तुत्य
कर्तव्य!
वर्ष नव्य
मार्ग हो सत्य
आचरण दिव्य !
सफलता हो भव्य ।
2
लें
प्रण
नूतन !
हो संकल्प
यही विकल्प!
यत्न नहीं अल्प
जीवन खिले पुष्प।

2 comments:

प्रियतम

उर द्वारे की सांकल खनकी,धड़कन ने मधु गीत लिखा। नयनों की आँखमिचोली ने,तुमको मन का मीत लिखा।। टेढ़ी मेढ़ी राहें मिलतीं,सपनों की पगडंडी में  कड़...