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अब हृदय की इस कलुषता को मिटाने के लिए।
प्रीति का नव गीत रच दो आज गाने के लिए।।
दौड़ने में वक़्त गुजरा,चाह अब विश्राम की
दो घड़ी का साथ हो सुख चैन पाने के लिए।।
अनिता सुधीर आख्या
शुभ दिन आयुर्वेद का,मना रहे सब लोग। वैज्ञानिक आधार का,उत्तम है संयोग।। शरद विषुव के काल में,होते सम दिन-रात। हो जीवन में संतुलन,समझें सब यह...
सुन्दर मुक्तक। साधुवाद
ReplyDeleteसादर आभार
ReplyDeleteअत्यंत सुन्दर मुक्तक 💐👌💐
ReplyDeleteवाह शानदार
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