**
अब हृदय की इस कलुषता को मिटाने के लिए।
प्रीति का नव गीत रच दो आज गाने के लिए।।
दौड़ने में वक़्त गुजरा,चाह अब विश्राम की
दो घड़ी का साथ हो सुख चैन पाने के लिए।।
अनिता सुधीर आख्या
नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान में तुच्छ योगदान नशा धूम्रपान धुँए के बनते छल्लों में परिवारों का सपना सोया पेट काट कर शुल्क चुका...
सुन्दर मुक्तक। साधुवाद
ReplyDeleteसादर आभार
ReplyDeleteअत्यंत सुन्दर मुक्तक 💐👌💐
ReplyDeleteवाह शानदार
ReplyDelete