Thursday, November 14, 2019


जेब
कुंडलिया

खाली हो यदि जेब तो ,बिखरे मन की आस।
धन से परि  पूरित रहे  , देती  मन विश्वास ।।
देती मन  विश्वास  , जेब की महिमा न्यारी ।
मिलता है सम्मान ,जेब हो जिसकी  भारी।।
रौनक है त्यौहार    ,जेब से मने  दिवाली।
सत्कर्मों से जेब भर , यहाँ से जाना खाली ।।

©anita_sudhir

4 comments:

  1. सत्कर्मों से जेब भर , यहाँ से जाना खाली
    रुपए पैसे की महत्वता है... जरूर मगर जब जाना होगा इस लोक से दूसरे लोक में बस हमारे सत्कर्म ही हमारे साथ जाएंगे.... अंतिम पंक्तियों ने पूरी रचना के सार को प्रदर्शित कर दिया बहुत खूब लिखा आपने👌

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    1. आप की इतनी सुंदर प्रतिक्रिया से लेखन सफल रहा आ0 ,
      सादर आभार

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प्रियतम

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