हाइकु
पथिक
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पथिक मन
कल्पनाओं का रथ
नव सृजन ।
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निशा डगर
चाँद तारे पथिक
भोर पड़ाव।
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तन पथिक
जीवन अग्नि पथ
मृत्यु मंजिल ।
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सच्चाई पथ
बाधाएं झंझावात
बढ़ो पथिक ।
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जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं आओ कान्हा ! मन हल्का कर लें रस्म निभाने आते उत्सव घर की चौखट सकुचाए दुविधा लेकर खड़ा हुआ मन स्वागत कैसे क...
वाह! बढ़िया हाईकू है।
ReplyDeleteJee shukriya
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