Monday, December 30, 2019


बीता साल
छन्द मुक्त
***
बीता साल
बीता ,पर
बीतने के लिए नहीं बीता!
चलता रहा ,
लड़खड़ाता  ,गिरता ,संभलता
कभी सही कभी गलत।
पर
ठहरा नहीं
ठिठका नहीं
डरा नहीं !
कभी शून्यता में अटका नहीं।
भटकाव लिए भटका नही
सहता रहा वार
सामने ,कभी पीछे से
रुका नहीं सहमा  नही
बीता साल बस चलता रहा ।
दुश्मन के घर तक गया ।
प्रचंड आंधी चली
तिनका तिनका सब बिखर  गये ।
लड़ता रहा अधिकार के लिए
धारा  से लड़ा
कुछ डरे कुछ डराये।
 बीता साल मंदिर गया
निर्णय लेता रहा।
बीता साल
चलता  रहा ,दौड़ता रहा !
इस  दौड़ने में कुछ धीरे धीरे
सुलगता रहा
और जाते जाते  जलता रहा ।
आने वाला साल
भी चलता रहे ,दौड़ता रहे ,
सड़ा  गला हटाना है
शिखर तक जाना है  ।


अनिता सुधीर








2 comments:

  1. वाह!!!
    बहुत खूब।
    नये साल की अनन्त शुभकामनाएं।

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प्रियतम

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