हाइकु
पथिक
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पथिक मन
कल्पनाओं का रथ
नव सृजन ।
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निशा डगर
चाँद तारे पथिक
भोर पड़ाव।
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तन पथिक
जीवन अग्नि पथ
मृत्यु मंजिल ।
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सच्चाई पथ
बाधाएं झंझावात
बढ़ो पथिक ।
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उर द्वारे की सांकल खनकी,धड़कन ने मधु गीत लिखा। नयनों की आँखमिचोली ने,तुमको मन का मीत लिखा।। टेढ़ी मेढ़ी राहें मिलतीं,सपनों की पगडंडी में कड़...
वाह! बढ़िया हाईकू है।
ReplyDeleteJee shukriya
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